समझ कर खुद को ही इक सौदागर ईमान का दर दर भटकने मैं लगा हूं जान के फैसला आवाम का घबराने लगा हूं
सच ये सौदा ईमान का है मुश्किल खरीददार मिलते जल्दी कहां देख के सन्नाटा राह ए ईमान घबरा कर डरने लगा हूं
कद्र ईमान की वो क्या जाने जो खुद ही नीयत से बेईमान जान के नीयत जमाने की होकर मायूस अब डरने लगा हूं
कर लो मनमानियां मर्जी के मुताबिक खिलाफ कर ना पाऊंगा करके कोशिश तमाम फासला तुमसे बढ़ाने लगा हूं
होकर मायूस तेरी अदावत से चिराग़ ए दिल अब मैं बुझाने लगा हूं समझ कर तुम्हें अब गैर आदत मैं बदलने लगा हूं
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