आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फसाना ए बेकरार दिल

                
                                                         
                            दिया तसल्ली हमें हर इक ने फिर भी आराम दिल को कहां हम सुनते रहे मगर लब पे तेरा नाम ना आया
                                                                 
                            
ये ना पूछो दिल की राहों में सफर किया कैसे रहा खुशनसीब में इतना कि मुझ पर कोई इल्जाम ना आया
लगता है दिल ए बेताब तुझे मेरी कोई जरूरत नहीं भटक गए हम इधर उधर मगर वो मुकाम ना आया
सफर दिन का बीता कैसे ये ना पूछो मुझसे लाख की कोशिश मगर कभी वो मुंतजिर ए शाम ना आया
ये बेचैनियाँ तो रहेंगी दिल में हमेशा दर्द सिर्फ इस बात का है तेरे लब पट कभी मेरा नाम तक न आया
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर