आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

फसाना ए बेचैन जिंदगी

                
                                                         
                            बढ़ाया फासला जब से दरमियां आह लब पे रह जाएगा तू न हो सकेगा मेरा कभी सोच कर ये दिल प्यासा रह जायेगा
                                                                 
                            
सामने तेरे दर से यूं ही खामोश गुज़र जाएंगे जो जख्म दिया है तुमने किसी रोज सीने में बन कर हादसा रह जाएगा
कुर्बतों की राह गुज़र मिला क्या हमें खुश तू ही देख कर मेरी मनहूस जिंदगी दिल में तसव्वुर का आसरा रह जायेगा
तेरे न होने पर निगाह ए शौक ए दीद का हाल मत पूछो मैं बिखर गया अब लेकर तू चिराग हमको ढूंढता रह जायेगा
तू खुश बढ़ा के फासला मुझसे कोई बात नही मुबारक तुम्हें ये जिंदगी दिल में मेरे भी सिर्फ याद खुदा का रह जायेगा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर