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फसाना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            पलट के आवाज आपको लगाया नहीं मैने दिल मेरा भी पत्थर नहीं ये भी सच कभी आपको सुनाया नहीं मैने
                                                                 
                            
मेरी बरबादियों का मजाक उड़ाने वाले तुमने कभी समझा नहीं खाकर ठोकरें मिला है जो दर्द सुनाया नहीं मैने
देकर वादे हज़ार दिल मेरा जलाने वाले अंदाज़ तेरा समझ ना पाया मैं सहेज कर अरमां सच बताया नही मैने
तुम्हें इस वक्त मेहरबान किस पर होना है ये तू जानता है और हमें तो साथ तेरा चाहिए ये दर्द बताया नहीं मैने
बेहतर है जुर्म सारे मेरे लिख दो तू ही अभी अभी खिलाफ तेरे कभी होना है मुझे ये तो कभी नहीं बताया मैने
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2 महीने पहले

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