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फसाना ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            जाने कैसे कैसे ख्याल दिल में ही आने लगे है बुझा के चिराग़ ए दिल वफा की राह में नाकामियां अपनी बढ़ाने लगे हैं
                                                                 
                            
किस्सा किस्मत जाना कब किसी ने बढ़ा के धड़कनें दिल की होकर मायूस जिंदगी से मजबूरियां तुम्हें बताने लगे हैं
हाल ए गम मेरा जानने वास्ते सामने तू भी आता नहीं मुझको दर ब दर करने वाले नादानियां अपनी बढ़ाने लगे हैं
देकर साथ मेरा हौसला बढ़ाया कब तूने कोई साथ दे या ना दे निभा के फर्ज शिद्दत से बेकरारियां हम बढ़ाने लगे हैं
परख कर हुनर मौका परस्ती का आपका कहानियां हम सुनाने लगे जीने में रखा क्या सोच के दर्द हम बताने लगे हैं

 
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2 महीने पहले

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