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फसाना ए बेचैन अरमां

                
                                                         
                            मुश्किलें आसान होती नहीं आया जब कभी मैं सामने तेरे करूं अब क्या बात दिल की कभी तुमसे होती नहीं
                                                                 
                            
ये वो दुनिया है जहां फरिस्ते अब मिलते कहां देकर हमें जख्म बार बार मगर गुफ्तगू कभी तुमसे होती नहीं
वफा की राह में दुआ किसी की सुनता कहां बिछड़ कर तुमसे हुआ जीना मुश्किल इंतजार अब होती नहीं
सुनाऊं तुम्हें क्यूं फसाना ए दर्द अपना ये नादान दिल भी सिमट पाया कहां और सच हज़म तुमसे होती नहीं
कहूं सच कैसे नए चेहरों में भी अब वो कशिश कहां दिखा कर इक तस्वीर पुरानी और बात तुमसे होती नहीं

 
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एक घंटा पहले

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