गमों की बारिश में भीगना चाहता हूं इतना खुशनसीब नहीं जो दर्द कह सकूं मिल कर तुमसे कुछ कहना चाहता हूं
है आंधियों का काम उड़ा कर ख्वाब सारे कहीं और पटक देना बुझा के चिराग़ दिल ए दर्द अपना कहना चाहता हूं
सच तो ये है मेरी नाकामियों ने किया हमें बर्बाद हमेशा चल कर साथ दो कदम तेरे अब कुछ अर्ज करना चाहता हूं
देख कर आज़ सामने तुम्हें दर्द कहना पड़ा हमें मिल कर तुमसे जुदा ना हो पाएंगे ये सच सामने कहना चाहता हूं
तुम क्या सोच कर फासला बढ़ाने लगे करके सामना बेचैनियों से बुझा के चिराग़ ए दिल मैं कुछ कहना चाहता हूं
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