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फलसफा जिंदगी का

                
                                                         
                            करके बेकरार दिल को चिराग ए दिल अपना बुझाया नहीं करते बढ़ा कर मायूसी दिल में दर्द कभी बढ़ाया नहीं करते
                                                                 
                            
मिले तुम आज़ अचानक मुझसे क्यूं बताओ हाल अपना करके बगावत तू मुझसे गिला अजनबी से किया नही करते
बुरा वक्त जब आता है अपने हो जाते पराए सुना के दर्द अक्सर हर इक को मायूसी दिल में कभी बढ़ाया नहीं करते
समझ कर फलसफा जिंदगी का घबराए हम बहुत राह ए तलब जान के इरादा किसी को हम आजमाया नहीं करते
मेरी बर्बादियों ने घुट घुट कर जीना सिखा दिया वक्त ए रुखसत जान के फैसला आपका दिल हम सताया नहीं करते
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2 महीने पहले

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