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दर्द ए बेचैन दिल

                
                                                         
                            मिल के तुमसे किया महसूस मैने भी जिससे दिल लगाए बैठे हो देकर नसीहतें बार बार चिराग़ ए दिल बुझाया आपका
                                                                 
                            
वो अजनबी कौन था थाम लिया हाथ अभी अभी मजाक में ही दरिया में उतरना आसान कहां हौसला बढ़ाया आपका
ऐ बेचैन ख्वाहिशें मत पूछो सताया गया कितनी बार हुआ हैरान ये देख कर जब अजनबी ने भी हाथ मिलाया आपका
क्या पता था हमें वक्त ऐसा भी आएगा जब जीना पड़ेगा गर्दिश ए हालात में फिर क्या सोच कर दिल सताया आपका
देखा मैने कितनी बार मिजाज़ आपका बदलते हुए इतना मौका परस्त मैं नहीं हूं जो मिजाज़ कभी जान पाया आपका
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3 महीने पहले

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