अपनी तन्हाइयों से घबराने मैं लगा हूं करके याद तुम्हें सिमटती यादों से बढ़ा के अरमां दिल के याद करने लगा हूं
छोड़ के गर्दिश ए हालात में गर खुश हो तो ये मर्जी तेरी बिछड़ कर तुमसे ही यादों के कारवां में भटकने मैं लगा हूं
होगा अंजाम ए वफा बुरा सोचा कहां मैने बुझा कर अरमां दिल का होकर मायूस फैसला भी अब बदलने मैं लगा हूं
मिटा के हस्ती मेरी तुम दिल से खुश हो ना पाओगे करके जीना अपना हराम होकर मायूस अकेला चलने मैं लगा हूं
है अब इक दुआ मेरी ना करो मुझ पर रहम ओ करम कोई कुछ तो करो लिहाज़ मेरा मंजिल अब बदलने मैं लगा हूं
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