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अंदाज़ ए रस्म ए उल्फत

                
                                                         
                            मैने यूं देखा तुम्हें तो लगा पहले देखा नहीं और उठा कर तूने जब देखा तो मेरी आंखों को यकीं हुआ नहीं
                                                                 
                            
बेताब दिल की थी तमन्ना जी भर गुफ्तगू कर सकूं अंजाम ए मोहब्बत में उठेगा दीवार हमें यकीं हुआ नहीं
ऐ आंधियों तुम ठिकाना कहीं और ढूंढ लो इस वीरान जंगल में है ठिकाना किसी का हमें यकीं हुआ नहीं
लोग लाए हैं कहां से मर मर के जंगल में चिराग सच तो ये है जंगल में कोई रस्ता होगा ये यकीं हुआ नहीं
कल रात तन्हाई में इस कदर हम ही चौंक गए हवा में गूंजती इक आवाज तेरी थी हमें भी यकीं हुआ नहीं
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3 महीने पहले

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