देख कर कत्ल इंसानियत का इस ज़माने में अब चिराग़ ए दिल अपना बुझाना पड़ा हमें
देख कर सामने फौज़ जल्लादों की जान कर ज़माने की नीयत अब तो सर झुकाना हमें
मिला नहीं चैन ओ सकूं कभी बदनसीबों को परख कर अंदाज़ तेरा मुस्कुराना पड़ा हमें
जाओ चिराग मत खेलो तू अठखेलियां मुझसे बढ़ा के दर्द और सामने घबराना पड़ा हमें
समझ कर अपना दर्द सुनाए हैं खाकर धोखे वफा से करूं क्या सामने मुस्कुराना पड़ा हमें
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