हमीं से ही रुसवा कर दिल मेरा जलाया है आपने मगर मेरा कसूर है क्या कभी नहीं बताया आपने
सच ये कि नफरत की आग भी जलाया है आपने मगर मेरा नीयत ए शौक नहीं आजमाया आपने
मुकर कर हाल ए दिल मेरा ही दिल जलाया है आपने मगर चिराग ए मोहब्बत नहीं जलाया आपने
सच कहने का हौसला भी छीन लिया है आपने मगर अपनी पुरानी तस्वीर कभी नहीं दिखाया आपने
चुप रह कर इज़हार किया मैंने आप से और सितम ये भी कि जीने का हुनर हमें नहीं सिखाया आपने
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