रहा खफा मैं तेरी रुस्सवाइयों से ये सच तुमने कभी जाना कहां सुना कर बात दिल की यादें मैं ताज़ा करना चाहता हूं
तुम भी जान कर गैर हमें दीवार राह की समझने लगे जान कर मिजाज़ आपका हुआ जो दर्द तुमसे कहना चाहता हूं
जान कर फैसला तेरा घबराया बहुत और लाकर खामोशी लबों पे हुआ हमें जो नुकसान सच तुमसे कहना चाहता हूं
होकर मजबूर तुमसे फासला बढ़ाना होगा राह ए वफा मिलो या ना मिलो रख के हाथ दुखती रगों पे कहना चाहता हूं
मजबूर मैं इस कदर जो बदलते हालात में संभल ना पाया कभी बढ़ा कर फासला तुमसे आज ये सच कहना चाहता हूं
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