डूबा हुआ हूं मै ही गम की गहराइयों में कितना बदनसीब हूं अपनी खोखली दानाइयों में
यूं तो शहर में बह रही है गुस्ताखियां की आंधी खुद को अब छुपा रहा अपनी तन्हाइयों में
ख्याल आया तेरा यादों में ढलता गया अंधेरी रात में शरमा रहा मैं अंजुमन आराईयों में
था मैं बदनसीब खातिर जिसके बने थे हम तमाशा गौर से देखा तो थे वो तमाशाईयों में
अपना लो या नाज़ से ठुकरा दो मगर सोचा नहीं तुमने था दर्द कितना रात शहनाइयों में
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