सुना कर बात दिल की हम गुजारिश तुमसे अक्सर किया करते थे है तलख फसाने जिंदगी के हम कहा करते थे
तेरी गली में लोग थे दुश्मन मेरे पी के हम अरमां के आंसू सामने तेरे अक्सर दर्द अपना सुनाने हम आया करते थे
दर्द के फूल बिखर जाते थे जख्म जैसा हो अक्सर भर जाते थे और फेर कर नजर तुम भी गुजर जाया करते थे
जब चाहा तुमने भुला के बढ़ा दिया फासला जिस तरह आज तू बिछड़ा है उसी तरह से पहले भी किया करते थे
देख के बेरुखी घुट घुट आंसू पीना पड़ा हमें ऐ जिंदगी किया है महसूस अक्सर जख्म ऐसे हमें तुम दिया करते थे
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X