मेरी जिंदगी में ये करिश्मा कभी क्यूं नहीं होता हर रोज़ जिसे याद करता हूं वो सामने मेरे कभी क्यूं नहीं होता
मेरी जिंदगी के हिस्सेदार हो गए हैं कई मगर सितम ये कि मैं किसी की जिंदगी का दावेदार भी क्यूं नहीं होता
लोग हमेशा तंज कसते हैं मेरी तबियत बिगड़ जाने पे मगर हाल पूछने वाले बताओ मैं अच्छा क्यूं नहीं होता
ज़माने भर का दर्द तूने हमें दिया कितना कैसे कहूं जिंदगी मेरी बर्बाद करने वाले बता तू दूर क्यूं नहीं होता
जहां तक होना था हो गया बहुत मगर मुझ पर ऐतबार करने वाले बता जैसा सोचता हूं वैसा तू क्यूं नहीं होता
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