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अफसाना ए अंदाज़ ए बेरुखी

                
                                                         
                            पराई नींद में सोने का तजुर्बा हमसे ले लिया करो होकर तुम बेचैन मेरे हक में बददुआ इस तरह न दिया करो
                                                                 
                            
मैं चाहता हूं कभी खुल कर तुमसे ही बात करूं मुझ पर हक वफा का जता कर बेचैन इस तरह न किया करो
कभी सोचा करूं भांप कर बेरुखी तेरी हमें मर जाना चाहिए था देख के लाचारी जुल्म इस तरह न किया करो
हम आपके कोई गैर तो नही बढ़ा कर दर्द मेरा अपनी मर्जी के मुताबिक अरमां तुम इस तरह न मिटाया करो
तूने क्या सोच के नजर अंदाज किया हमें बढ़ा कर दर्द और तुम अब हमसे इस तरह इल्तिज़ा न किया करो
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2 महीने पहले

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