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तुमसे बढ़कर

                
                                                         
                            तुमसे बढ़कर न कभी और कुछ मांगा खुदा के दर पर,
                                                                 
                            
मिल जाते अगर तुम तो खुद को भी वार देती तुम पर,
तुम जब हँसती हो तो खिलखालाता हूंँ मैं,
तुम अगर हो जाओ ग़मगीन तो बे मौत मर जाता हूँ मैं,

दिल तो क्या नस-नस में हर पल तसव्वुर तुम्हारा ही है,
तुम जो लिखते हो ग़ज़ल वो मुझसे मोहब्बत का इशारा ही है,
न तुम मुझे और न मैं तुम्हें दिल से निकाल पाएंगे,
रहेंगे मन से एक-दूजे के तन से भले किसी और के बन जाएंगे,

तुम अपनी रस्में निभाना मैं अपनी कसमें निभाऊंँगा,
न मिल सके इस जन्म मगर अगले जन्म तुम्हें पाऊंँगा,
बैठेंगे गुफ्तगू की चाय पर दोनों मौन आँखों से बातें करेंगे,
न परवाह करेंगे दुनिया की इस दुनिया से हम बग़ावत करेंगे,

अहसासों को शब्दों का पहनाएंगे जामा और खुलकर एक-दूसरे से बातें करेंगे,
तुम बन जाना मैं और मैं तुम बनकर दो से एक बनकर प्यार की मिसाल कायम करेंगे,
न चाह रहेगी खुदा या किसी ईश्वर-अल्लाह की बस एक-दूसरे के मन-मन्दिर में रहेंगे, एक-दूसरे की पूजा करेंगे।
-प्रेम बजाज 
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एक वर्ष पहले

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