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बचपन का इतवार

                
                                                         
                            ना चिंता में जागी वो भोर,
                                                                 
                            
ना दिन भर की वो भागदौड़।
तरस गया है आईना,
मुझे फुर्सत से देखने को।
बचपन वाला वो इतवार,
अब कहाँ से लाऊँ।
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2 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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