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व्यवस्था की लंका

                
                                                         
                            मुर्गियों के बाड़े में आग लग गई,
                                                                 
                            
भूखों के पेट की आग बुझ गई।

कंपनी सेंसेक्स में धड़ाम हो गई,
शोषकों की जैसे दुआ फल गई।

पॉर्श कार डिवाइडर पर चढ़ गई,
सोए मजूरों की बेबस जान निकल गई।

विधवाओं को नोटों की गड्डी मिल गई,
अनाथों को चपरासी की नौकरी मिल गई।

खबरों में 'दरियादिली' की लहर चल गई,
दम तोड़ती सरकार को नई जान मिल गई।

करोड़ों का लोन माफ हुआ, करोड़ों की सौगात मिल गई,
कंपनी फिर खड़ी हुई और मजदूरों की फिर लंका लग गई।
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5 महीने पहले

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