इत्तफ़ाक, मुलाकात नहीं
तू मुझे भूल गई, मैं तुझे भूल गया,
बस इतना ही रिश्ता था हमारा, जानकर भूल जाने के लिए।
न तेरा रास्ता मेरा था, न मेरा रास्ता तेरा था,
सब इत्तफ़ाक था, बस एक-दूसरे को पहचान जाने के लिए।
न मेरे ख्वाबों ने कुछ कहा, न तेरे ख्वाबों ने कुछ कहा,
दिखते हैं मगर मिलते नहीं, फलक पर धरती और आसमाँ एक हो जाने के लिए।
तू अजनबी हो जा मेरे लिए, मैं अजनबी तेरे लिए,
तकदीर भी यह जान ले, इंसान गुलाम नहीं उसकी हर बात मानने के लिए।
चाँद निकलता है आसमाँ में तारे भी निकलते हैं,
रिश्ता रहता नहीं हमेशा, अमावस में साथ निभाने के लिए।
तू अपनी जगह रोशन हो, मैं अपनी जगह रोशन हूँ,
हम सब जिंदगी के पतंगे हैं, जो आते हैं जलकर राख हो जाने के लिए।
न तू भ्रम में रहेगी न मैं भ्रम से जीऊंगा,
ये जीवन तो बस एक दरिया है, एक किनारे से दूजे किनारे तक जाने के लिए।
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