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मेरे कानों में उस लड़की की आवाज़ गूंज रही थी

                
                                                         
                            मैं इस सत्र में डिग्री कॉलेज जाऊंगी,
                                                                 
                            
आपने कैसा समाज बनाया है,
मैंने एक पेंटिंग प्रदर्शनी में देखा,
महिलाओ के योग करते चित्रो को,
गंदी भावनाएँ मन में रख कर,
विकृत कर दिया,
कुरेद कर खराब कर दिया गया था,
जब महिलाएं पेंटिंग में सुरक्षित नहीं हैं,
वे असल जिंदगी में कैसे सुरक्षित रहेंगी.
यह पेंटिंग का बदसूरत करने का मामला,
यह गंदी मानसिकता है.

हम अखबारों में पढ़ते हैं,
महिलाओं के साथ योन हिंसा हो रही है
लड़कियों के हॉस्टल के बाथरूम में,
एक छिपा हुआ कैमरा मिलना,
महिलाओं के सार्वजनिक शौचालय में,
अश्लील तस्वीर,अनेक मोबाइल नंबर का,
लिखा होना,यह गंदा खेल कौन खेल रहा है.
क्या यही हमारा सभ्य समाज है,
क्या मैं सुरक्षित हूँ इस समाज में,
एक किशोरी सेमिनार के मंच से चिल्ला रही थी.
सेमिनार में उपस्थित सभी लोगो का,
सिर झुका हुआ था,
जैसे सब आत्म-ग्लानि,शर्म महसूस कर रहे हों,
मेरे कानों में उस लड़की की आवाज़ गूंज रही थी.
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2 महीने पहले

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