खुद को पाना जीवन है ,
खुद की सिद्धि जीवन है ,
क्या सोचा क्या कर्म किया ,
परिणाम उसीका जीवन है।
किसी संत ने कभी कहा था,
बोओगो जो वही कटेगा ,
व्यक्तित्व बीज ही बोया जाता,
कटता जो वो फल जीवन है ।
मानव की परछाई है ये,
मानव की अभिव्यक्ति अमूर्त है।
सोच तुम्हीं हो कर्म तुम्हीं हो,
कुछ और नही ये जीवन तुम हो।
लोगों का क्या,लोग लोग हैं,
करना है जो वही करेंगे।
व्यवहार किया है,तुमने कैसा,
कुछ और नहीं ये निर्णय तुम हो।
उत्थान करोगे विश्व पटल पर,
या बस ईर्ष्यापूर्ण जिओगे।
निर्मल अविरल कल कल सरिता,
या बंधे हुए तालाब बनोगे।
धारा में स्वच्छंद बहोगे,
या अंतस की गांठे फेरोगे।
जो भी प्रस्तुत होगा उसमें,
तुम अपने को दिखलाओगे।
सच्चाई के पथिक बनोगे,
या पाखंड प्रदर्शन के।
आलोकित घर द्वार करोगे,
या झूठा स्वांग रचाओगे।
शीलवान मर्यादित होगे,
सहज स्वभाव सरल पाओगे,
या आडंबर का बोझ लिए,
खुद को ही छलते जाओगे।
सबको अवसर मिलता है,
आज़ादी के संघर्षों का,
सबको अवसर मिलता है
धर्म ध्वजा वाहक बनने का।
सबको अवसर मिलता है,
ज्योति पुंज बन तम हरने का।
राह तुम्हारे जीवन की,
जो होगा तुम उस निर्णय से,
परिचय अपना दे जाओगे ।।
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