ना कोई सच्चाई ना कोई भावनाएं।
बस खेल है ये संसार
एक-दूसरे को नीचा दिखाना
कंट्रोल करना।
झूठी भावनाएं रखकर जाल
बिछाना।
मत आना किसी की भावनाओं में
सब खेल है।
सबके लिए खिलौने हैं कठपुतली बनाना है।
हाथ कोई नहीं देगा, गिराने के लिए सब
बैठे हैं।
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