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छल-कपटी लुटेरे रिश्ते

                
                                                         
                            अरे जब इंसान से नफ़रत है
                                                                 
                            
उस रिश्ते से नफ़रत है तो
उनके पैसे से भी नफरत करो।

पैसा तो चाहिए सेवा नहीं चाहिए।
हक चाहिए उस औरत का पर उसको
साथ नहीं रखना।

नफरत पूरी करनी है पर उससे मकान
धन रोज का ख़र्च सब कुछ चाहिए।

यही तो लूट-खसोट वाले लोगो की पहचान है।
इनको रिश्ते से कहीं प्रिय धन और जमीन होता
है।

यह किसी के संगे नहीं होते इनको पूरी दुनिया
से पैसा ऐंठना है पैसे नहीं मिल पाएं तो यह उस
इंसान को बदनाम करके छोड़कर चले जाते हैं।

सेवा जिम्मेदारी कर्तव्य फर्ज यह सब ईमानदार
लोगों के लिए बने हैं धोखेबाज छल कपट लूटने
वाले तो पैसा देखते हैं रिश्ते नहीं।
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एक घंटा पहले

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