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जो सारा जगत बनाता है

                
                                                         
                            जो नभ गगन धरा को सजाता है,
                                                                 
                            
जो सूरज चांद बनाता है....
जो तारों को चमकाता है.....
जो पुष्प पुंज महकाता है.......
जो चिड़ियों को चहकाता है।

जो सारा जगत बनाता है....
जिसने रची हमारी काया है
उस परम प्रभु को सदा मनाएं
हम नित्य प्रेम से शीश झुकाएं
अपना जीवन धन्य बनाएं ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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