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मरते दम तक ना भूल सके, छवि ऐसी न्यारी तेरी

                
                                                         
                            मरते दम तक ना भूल सके, छवि ऐसी न्यारी तेरी l
                                                                 
                            
चांदी सा चमकते बदन पर, जुल्फों की घटा घनेरी ll
ज़ब जहाँ तेरा अक्स पड़े, जर्रा जर्रा जाय
महक l
देख तेरी आंखे नशीली, सम्भल सके न जाय बहक ll
छलक जाय पानी हाथो में, जब चाल चले इठलाती l
इधर उधर संग डोले धरा, जब लचके कटि बल खाती ll
यूं दिखती धवल दंतावली, अगर किसी से कुछ बोले l
बिजली कौँधती रुखसार पर, जब ज़ब अपने लब खोले l
हर धड़कन जपे नाम तेरा, हर श्वास में तेरी महक l
कभी तो बनोगे तुम मेरे, रह गयी बस इतनी कसक ll
पथरा ही गयी निगाहेँ अब , ढूंढते तुझे गली गली l
मिलन की आश न छोड़ी कभी, पर हिम्मत अब ढली ढली ll
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3 महीने पहले

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