सुंदर हो तुम ये कह देने से,
क्यों प्रसन्न हो जाती हो,
इस क्षणभंगुर शरीर पर अपने,
तुम क्यों इतना इठलाती हो,
लक्ष्मीबाई सी शक्ति तुममें,
फिर क्यों अबला कहलाती हो ?
धरो रूप माँ काली का तुम,
नाश करो इन छलियों का,
कब तक छलेंगे तुम को ये कहकर,
कि तुम रूप गुलाब की कलियों का,
छोड़ो झूठी तारीफों पर तुम,
अपना सर्वस्व न्यौछावर करना,
उठे बुरी नज़र इनकी तो,
तय कर दो इनका मरना,
उठो करो तुम रक्षा अपनी,
बंद करो ये अबला बनना,
दिखाओ ताकत स्त्रीत्व की अपने,
रक्षा करो अस्तित्व की अपने.....
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