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सिया के राम

                
                                                         
                            रह के ताप में,
                                                                 
                            
प्रेमाग्नि प्रज्वलित हुई,
और
ह्रदयों को सौहर्द मिलता रहा |
सिया की गरिमा की रक्षा,
राम के शौर्य की परीक्षा,
दोनों ही इस अग्नि ने की |
और प्रदान हुई,
तिमिर बेला से आतंरिक दृष्टि,
और
इस व्याकुल मन को संतुष्टि |
प्रेमाग्नि ने आत्मबल दिया,
हर शंका का हल दिया,
सिया और राम के,
मिलन के मार्ग बनते गए,
साथी और सारथी दोनों ही,
इस मार्ग पर जुड़ते गए |
नियति का इस तरह से न्याय हुआ,
सियाराम का ये मिलन,
प्रेम का पूर्ण अभिप्राय हुआ |
समर्पण सत्य के प्रति,
त्याग भौतिक तृष्णाओं का,
नियंत्रण मानवीय विकारों का,
धैर्य प्रतिकूल परिस्थितियों में,
विश्वास काल के परिवर्तन में,
पावनता प्रेम भाव में,
करुणा हृदय में,
कर्मठता धर्म के उत्तरदायित्व की,
पराक्रम क्षत्रिय सा,
राम के व्यक्तित्व में,
प्रचण्ड रूप से उजागर हुआ,
और
इस तरह काम आई,
ये प्रेमाग्नि,
सिया के मान की रक्षा के,
महा युद्ध में,
जहाँ
बल और बुद्धि का,
अनूठा संतुलन लिए,
राम ने पराजित किया,
धर्म और न्याय के दायरे में,
नियति का अभय रूप बनकर,
रावण के
इस लोभ को,
अनगिनत विकारों को,
अहंकार को,
दुर्व्यहार को,
और
पा लिया अनन्त के लिए,
इस प्रेम को,
सिया वर राम के रूप में |

प्रदीप्ति
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3 वर्ष पहले

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