आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

इतिहास..

                
                                                         
                            जर जर होता इतिहास,
                                                                 
                            
तिनका तिनका इसका बिखरता,
हर तिनके में छिपी हैं कहीं,,
अतीत की अनगिनत अनकही बातें,
राजा थे, साम्राज्य थे, प्रजा थी,
शत्रु थे, राजद्रोही भी,
द्वन्द्व हुए, षड्यंत्र भी,
विजयी हुए, पराजित भी,
उत्थान हुआ, पतन भी,
मगर फिर भी
एक कलाकार अपना कार्य करता रहा,
निर्माण का, कारीगरी का,
तराशता रहा पत्थर,
देकर उनको आकार कई |
वक़्त के साथ,
ये आकार विकृत होते गए,
मगर इनका आधार वहीं रहा,
अडिग, शाश्वत,
ये ही असली शक्ति है कला की,
एक कलाकार की |
-प्रदीप्ति
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर