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क्या पता था दोस्त ऐसे भी दग़ा दे जाएगा

                
                                                         
                            क्या पता था दोस्त ऐसे भी दग़ा दे जाएगा
                                                                 
                            
अपने दुश्मन को मेरे घर का पता दे जाएगा

उसको अपने घर बुलाया था इसी उम्मीद से
वो किसी बीमार को थोड़ी दवा दे जाएगा

फूल,पत्ते,शाख,गुलशन सब के सब बाग़ी हुए
पर न सोचा था कि वो ऐसी सज़ा दे जाएगा

हमने सोचा था कि ये सब माजरा ही ख़त्म हो
पर न सोचा इश्क़ को वो फिर हवा दे जाएगा

क्या कहें अब दिल की हालत तूं ही जाने या ख़ुदा
मरने वाला मरते मरते भी दुवा दे जाएगा

'दीप' जलते हैं तो जलता साथ तन मन ये मेरा
चन्द सांसें इश्क़ को क्या ना-ख़ुदा दे जाएगा
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
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2 महीने पहले

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