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हर मज़हब में प्रेम सिखाया जाता है

                
                                                         
                            ग़ज़ल
                                                                 
                            

पर्दा झूठ का जब सरकाया जाता है
सत्य का अनुपम मार्ग दिखाया जाता है

बात सियासत-बाज़ी की होती जब जब
सच के ऊपर झूठ बिठाया जाता है

सोच समझ कर यारो अपना मुंह खोलो
बे-मक़सद क्या तीर चलाया जाता है

अपने दिल में झाँक के देखो तुम यारो
'ऐब-ओ-सवाब कहांँ पे पाया जाता है

मत नोचो कमसिन कलियों को खिलने दो
ग़ुन्चो से गुलशन महकाया जाता है

ज़ह्र उगलने वालों का जो फन कुचले
सर आँखो पर उन्हें बिठाया जाता है

क़त्ल-ए-अमद को बैठें हैं जाने कितने
दिल पे तेग़-ए-इश्क़ चलाया जाता है

'दीप' उठाई किसने नफ़रत की दिवारें
हर मज़हब में प्रेम सिखाया जाता है
-प्रदीप तिवारी 'दीप'
 
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एक घंटा पहले

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