होते हैं लोग
बैठे-ठाले
अपने ड्रॉइंग रूम में
होते हैं कुछ
अख़बार पढ़ने में
मशगूल
तो कुछ
लिए लकीरें
अपनी पेशानी में
जाने किधर को देखते हुए
तहते हैं घूरते अपलक
इनमें से होते हैं कुछ
समस्याओं के साथ
बैठे
ये लोग
नहीं करते महसूस
खुद को अकेला कभी
क्योंकि हैं समस्याएं ही
इनके बंधू-बांधव
बैठे-बिठाए ही
सुलझा लेते हैं
ये लोग
कई समस्याओं को अपनी
क्योंकि डरते नहीं
ये लोग
समस्याओं से
होते हैं ये लोग
जीवन में सफल
नहीं लगता इनको
जीवन अपना निष्फल।
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