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श्रीकृष्ण की विशाल महिमामयी भावना

                
                                                         
                            सब योगों से है बढ़कर
                                                                 
                            
कर्मयोग
दिया था यह ज्ञान
श्रीकृष्ण ने
गीता में
जहां समझाया था उन्होंने
कर्म और फल का नियम
श्रीमद्भगवतगीता के दूसरे अध्याय
(सांख्य योग) के ४७ वे श्लोक में
है निहित
कर्णयोग का
सबसे प्रसिद्ध एवं महत्वपूर्ण
संदेश
जिसके अनुसार
कर्मण्यवाधिकारस्ते
मा फलेषु कदाचन
आशय है जिसका
कि चाहिए करना
निष्काम कर्म
यानी फल की इच्छा रखे बिना
किया गया कर्म
असल में
श्रीकृष्ण पर भरोसा
करने वाला व्यक्ति ही
करेगा निष्काम कर्म
क्योंकि जानता है वह
कि देंगे श्रीकृष्ण
उचित फल
उसके कर्म का
फिर क्यों न विश्वास करे कोई
श्रीकृष्ण पर
उनकी सब पर
अनुग्रह करने की
विशाल महिमामयी
भावना पर।
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एक महीने पहले

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