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निखारिए आशा से अपनी सूझ-बूझ

                
                                                         
                            फूटती है जो अग्नि
                                                                 
                            
जलाने के लिए
जंगल को
बुझने पर
उस अग्नि के
धरती उगाती है फूल
जानते हैं किसलिए?
क्योंकि ये फूल हैं प्रतीक
उस आशा के
जो जगती है मन में
एक चिंगारी की मानिंद
वह आशा
जो कहती है
पुकार-पुकार कर
कि हो जाएगा
सब कुछ ठीक
पहले की तरह ही
फिर क्यों करता है फ़िक्र
तू हे मनुज
निखार आशा से
अपनी सूझ-बूझ।
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3 महीने पहले

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