मन में है भरा
गुस्सा बहुत
खासकर जेन जी
पीढ़ी के लिए
कहता हूं जब उनसे
कि रहूंगा नहीं मैं तो
देखने के लिए वह सब
जो आएगा सामने
लेकिन आप सब तो
झेलेंगे उसे
जवाब में व्यंग्य से
हैं कहते मुझसे
जेन जी के युवा
कि अंकल सोचते हैं
बहुत आप
खामख्वाह करते हैं
बहुत चिंता आप
जो है एकदम बेवज़ह
व्यक्तिगत रूप से
हमारा थोड़ा प्रदूषण
फ़ैलाने से
भला क्या पड़ जाएगा
फर्क
क्या उससे रुक पाएगा
जलवायु परिवर्तन?
जानते नहीं या शायद
जानना चाहते भी नहीं
ये युवा
कि थोड़ा-थोड़ा
व्यक्तिगत योगदान भी
'हो जाता है
बढ़ते-बढ़ते
बहुत बड़ा और गंभीर
एक दिन
इसलिए प्रदूषण को रोकने का
है ज़रूरी
हर व्यक्तिगत प्रयास
नहीं तो प्रदूषण
और जलवायु परिवर्तन
को रोल्ने की नहीं बचेगी
कोई भी आस।
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