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मां की महिमा

                
                                                         
                            सचमुच इस संसार में
                                                                 
                            
नहीं ले सकता
मां की जगह कोई भी
बच्चों की शरारतों
और मनमानियों को
झेलती है जिस तरह से मां
जितने संयम, धैर्य
और इन सबसे ऊपर
बलिदान से
अपने बच्चों से
पेश आती है मां
उसके अलावा
यह वश में नहीं
और किसी के
मां के जाने के बाद
आती है मां की याद
बच्चों को
कई मन ही मन
बिलखते हुए
करते हैं याद मां को
निकलती है उनके अंतर से
यह आवाज़
कि क्यों नहीं हो आप
मेरे साथ मां
कर रहा हूं
अपने आंसू रोकने की
पूरी कोशिश मैं मां
क्योंकि जानता हूं कि अब तुम कभी
नहीं आ सकोगी मां।
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2 महीने पहले

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