आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कविता की यात्रा

                
                                                         
                            आधे-अधूरे विचारों से
                                                                 
                            
बनती नहीं है
कभी कविता
किसी एक भाव को
पकड़कर
बुनना पड़ता है उसमें
मानीखेज ताना-बाना
तभी निर्णायक मोड़
पर पहुंचंकर
होती है कविता पूरी
तब आधा-अधूरा विचार
पहुंच कर
अपने अंजाम तक
होता है सार्थक रूप से
अभिव्यक्त अपने
पूर्णता को प्राप्त अपने।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर