अवसाद और बेचैनी
यानी एंग्जायटी से
हैं ग्रस्त
न जाने इस दुनिया के
कितने ही लोग
अब तो पर्यावरण को
लेकर भी
हो रही है पैदा
युवाओं के अंदर बेचैनी
जिसे दिया जा रहा है नाम
'ईको एंग्जायटी' का
और तो और
अब तो जा पहुंचा है
अवसाद
विमानों के कॉकपिट
के अंदर भी
जिससे मिल रही है
विमान-यात्रियों को
दर्दनाक मौत
असल में,
अवसादग्रस्त व्यक्ति
समझ लेता है
समूचे संसार को ही
शत्रु अपना
'जब जी नहीं पा रहा मैं
तो और लोग भी क्योंकर
जिएं ख़ुशी-ख़ुशी'
यही दुर्भावना
उतर जाती है
गहराई से
उसके मन-मस्तिष्क मैं
ऐसे में
है समझना ज़रूरी
अवसादग्रस्त लोगों की
मनोभावना
और उनके मनोविज्ञान को
अवसाद से छेड़कर जंग
उनकी सही चिकित्सीय
देखभाल भी
है बहुत ज़रूरी
ऐसे लोगों के प्रति
होना चाहिए
मन मैं सद्भावना, सहानुभूति
और सहयोग का भाव
तभी बदले मैं
मिल सकेगा
हमें उनका सद्भाव।
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