सच की लाश पर झूठ का कफन,
झूठ की आङ मे सच का दफन
कल की बात आज हुई गबन ,
ऑख की रोशनी हो गई बेदम
सच है क्या, झूठ भी क्या जनाब
दोनो का रिश्ता भी अजीब है गर,
सोचो झूठ के बगैर सच क्या यार
और सच बिना झूठ का इंतकाल
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