कोई भी न जाने मानव मन की पीर,
भला कोई कैसे बताए हृदय को चीर,
आवरण से लिपटा हँसमुख चेहरा,
पर!भीतर तो घाव हैं अति गंभीर।।
महाठगिनी है संसारी माया की जंजीर,
खोना-पाना ही समझे जिसे अपनी तकदीर।
जिसने समझा जीवन-मर्म, व्यथा का रहस्य,
वही बन गये बुद्ध गौतम, नानक और कबीर।।
जीत सका न काल कोई भी अमीर,
कुटिया में मस्त जीवन जीते फकीर।
बाजार की भीड़ में उलझा अशांत मन,
पर जीवन का सार—शील, संयम और धीर।।
- प्रदीप सोनसर्वदीपाक्षर
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