ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार।
दूर करो मेरे मन के विकार,
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥१।।
जन्मों से भटका हूँ,
तेरे दर्शन को तरसा हूँ।
अब चरणों में भक्ति दे दो अपार,
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥२॥
तुम कान्हा की प्यारी कहलाती,
सब देवों द्वारा पूजी जाती।
कुंज गलिन में श्यामा बनकर,
तुम ही रास रचाती।
तेरी कृपा की शीतल छाया,
पा जाए यह संसार।
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥३॥
हे वृषभानु दुलारी,
तुम ही मेरी भाग्य-विधाता।
तेरे चरणों से जुड़ जाए,
मेरे जीवन का हर नाता।
भक्ति का यह दीप जलाकर,
आया तेरे द्वार।
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥४॥
ओ कान्हा प्यारी, तुम अनुपम,
कान्हा के दिल की धड़कन।
तेरी करुणा पाने को तरसे,
भक्तों का यह मन।
भवसागर की लहरों से,
अब कर दो नैया पार।
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥५॥
हे कीर्ति कुमारी,
वृषभानु दुलारी गोरी।
बाँध लो अपनी भक्ति में,
मेरे जीवन की डोरी।
तेरे सिवा अब इस दुनिया में,
कोई न तारणहार ।
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार॥६॥
समापन
हे रास-विलासिनी,
हे भाव-व्याधि-विनाशिनी।
अब शरण तिहारी आया हूँ,
तन-मन-धन और जीवन,
तेरे चरणों में लाया हूँ।
जब तक साँसों की डोर चले,
गाऊँ महिमा बारंबार।
राधे-राधे, राधे-राधे,
जय श्री राधे सरकार!
ओ राधा रानी, ओ श्यामा प्यारी,
सुन लो मेरी पुकार ।
-प्रभात कुमार प्रभात
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X