हृदयतल की गहराइयों में,
तेरी यादों की जड़ें जमीं हैं।
मेरी रग रग में तेरी खुशबू बसी है।
मेरे दिल में तेरी चाहत सजी है।
तेरा अहसास ही,
मेरे लिए जीने की दवा है।
पल भर भी गर जुदा हो जाऊँ ,
बहतर हो मैं खुद को ही भूल जाऊँ।
- प्रभात कुमार "प्रभात"
अपना घर कोलौनी,
हापुड़, उ.प्र.
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