आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

संस्कृति की नायिका मातृभाषा

                
                                                         
                            संस्कृति की नायिका से।
                                                                 
                            
संस्कृति की संवाहिका से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

संस्कृति को द्वार से।
भावनाओं को प्रवाह से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

आमरी पहचान से।
समाज की शान से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

हर शब्द येको मोती से।
सदियों पासून संगाती से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

हर शब्द येको चेतना से।
येको लक आमरी एकता से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

मातृभाषा गुणवान से।
येको वैभव मा सम्मान से।
मातृभाषा आमरी पोवारी,
समाज की अनमोल धरोहर से।।

-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर