लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज का नेंगदस्तूर लिखों ।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
सावन ना बसंत पर भी सुंदर गीत लिखों।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज की संस्कृति पर लिखों।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
पुण्यभूमि भारत पर भी साहित्य लिखों ।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपली मातृभाषा पोवारी पर लिखों।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
सनातन हिन्दू धर्म-कर्म पर भी लिखों।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज महान पूर्वजों पर लिखों ।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
समस्त भारत को महापुरुषों पर भी लिखों।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज को बिहया बरात पर लिखो।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
भारतवर्ष की विदेश नीति पर भी लिखों।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज की सभ्यता पर खूब लिखों।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
भारतवर्ष की सभ्यता व संस्कृति पर भी लिखों।।
लिख् सेव त् अवश्य लिखों
निज समाज की समस्या-समाधान पर लिखों।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
निसर्ग को सौंदर्य अना महिमा पर भी लिखों।।
- ओ सी पटले
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