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पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े

                
                                                         
                            नव चेतना की ज्योति जलें।
                                                                 
                            
मातृभाषा पर प्रेम की वर्षा होये।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

मातृभाषा को सौंदर्य बढ़ें।
मातृभाषा को वैभव बढ़ें।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

मातृभाषा की हवा चलें।
मातृभाषा की आंधी चलें।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

मातृभाषा को प्रचार होये।
मातृभाषा को प्रसार होये।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

श्रृंगारित साहित्य बनें।
अलंकृत साहित्य बनें।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

साहित्य मा भावों को उद्रेक से।
कल्पनाओं की ऊंची उड़ान से।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

कलाकारों मा उमंग से।
कलाकारों मा उत्साह से।
आमरो धुआंधार प्रयासों लक,
पोवारी भाषा वैभव को झंडा गड़े।।

-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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