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पोवारी भाषा का गंगा घोड़ा...

                
                                                         
                            नित्य नियमित नवों नवों
                                                                 
                            
साहित्य प्रकाशित होय रहीं से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

आता अमर उजाला मा
साहित्य प्रकाशित होय रही से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

हिन्दी साहित्यिक मंचों पर
साहित्य प्रकाशित होय रही से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती ।।

हरियाणा की पत्रिका मा
साहित्य प्रकाशित होय रही से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

आता पोवारी साहित्य मा
भावों की गहराई दिस रहीं से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

आता पोवारी साहित्य मा
अलंकारों को प्रयोग होय रही से।
अना मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

नवों साहित्य मा
कल्पनाओं की ऊंची उड़ान से।
आता मातृभाषा पोवारी का,
गंगा घोड़ा नाहाय रहया सेती।।

-ओ सी पटले
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एक महीने पहले

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