छत्तीस गोत्र को सैनिक संघ।
रिश्तेदारी मा जब् बंध गयेव।
समान भाषा संस्कृति को कारण,
स्वतंत्र जाति संस्था बन गयेव।।
छत्तीस गोत्र को से समाज।
येवच आमरो जाति समुदाय ।
सजातीय विवाह को से विधान।
सगोत्र विवाह से महान पाप समान।।
गौतम, बिसेन, पटले, राहांगडाले ।
शरणागत, ठाकूर, बोपचे,टेंभरे।
मानों आपलो गोत्र ला पावन धाम।
सगोत्र विवाह से महान पाप समान।।
तुरकर, रिनाईत, चौहान कटरे।
भगत,चौधरी, येड़े, हरिणखेड़े।
मानों आपलो गोत्र ला पावन धाम।
सगोत्र विवाह से महान पाप समान।।
हनवत, पारधी, परिहार , अंबुले ।
पुंड, राणे, क्षीरसागर अना बघेले ।
मानों आपलो गोत्र ला पावन धाम।
सगोत्र विवाह से महान पाप समान।।
भैरम, कोल्हे अना सोनवाने ।
जैतवार, भोयर अना सहारे ।
मानों आपलो गोत्र ला पावन धाम।
सगोत्र विवाह से महान पाप समान।।
रणमत, राऊत , राजहंस ।
फरीदाले, डाला ,रणदिवा ।
ये सय कुल आता नाहात हयात ।
बिहया जोड़न साती गोत्र ठेओ याद।।
सगोत्र विवाह वर्जित से।
अंतर्जातीय विवाह भी वर्जित से।
मानो आपलो गोत्र ला पावन धाम।
बिहया जोड़न साती गोत्र ठेओ याद।।
-ओ सी पटले
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X