निर्झर सी बहती रहों सदा ।
फूलों वानी महकती रहों सदा। अभिलाषा से कि मातृभाषा,
वाणी पर इठलातीं रहों सदा।।
साहित्य मा ढलती रहों सदा।
समाज मा गूंजती रहों सदा।
अभिलाषा से कि मातृभाषा,
वाणी पर इठलातीं रहों सदा।।
पवन वानी बहती रहों सदा।
सावन वानी बरसती रहों सदा।
अभिलाषा से कि मातृभाषा,
वसुंधरा पर गूंजतीं रहों सदा।।
गीतों मा श्रृंगारित होवो सदा।
मंचों पर प्रतिष्ठित होवो सदा।
अभिलाषा से कि मातृभाषा,
समाज मा प्रतिष्ठित रहों सदा।।
रेशमी बंधन बनी रहों सदा।
समाज ला जोड़ती रहों सदा।
अभिलाषा से कि मातृभाषा,
दिलों पर राज करती रहों सदा।।
मातृभाषा को स्वर गूंजत रहों सदा।
मधुर स्वर कानों पर पड़त रहों सदा।
अभिलाषा से कि आमरी मातृभाषा ,
हिन्दू धर्म की संवाहिका रहों सदा।।
-ओ सी पटले
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